क्या?
क्या सच में कभी कुछ ठीक हो पायेगा,
मै लाख कोशिश करू आगे बढ़ने की ,
क्या मेरा अतित मुझसे छूट पाएगा ?
मेरे जख्म आज भी ताजा हैं
क्या इसे भी कोई ठीक कर पाएगा ,
छूट चूकी है सारी उम्मीदें मुझे इस जिंदगी से ,
क्या कोई मेरा अपना हो पाएगा ?
मेरे बीते हादसे मुझे आगे बढ़ने नही देते ,
क्या कोई इन हालातों से मुझे निकाल पाएगा ?
मैं छोड चुकी हूँ , जीने की उम्मीद को ,
क्या एसी जिंदगी में कोई मोहब्बत भर पाएगा ,
मेरा आखरी सवाल यही है खुदा से ,
क्या कभी सच में सब ठीक हो पाएगा ?
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