वो भी वक्त था , ये भी वक्त है
वो भी वक्त था , ये भी वक्त है कभी मुस्कराते हूए दिन शुरू होता था , आज दिन से रात गुजर जाते हैं , लेकिन एक सच्ची मुस्कान नहीं मिलती। कभी दोस्तों के साथ सुनहरे पल बिताते थे , आज हर पल अकेले ही कटते हैं । कभी लोग अपना प्यार देने आते थे , आज उनके किस्से याद आते हैं। जो झूठे वादे कर के भूल गए , आज कहीं और जीवन-भर की कसमे खा रहे है । कभी गैरों से बचकर अपनों के पास आते थे ,आज अपने ही गैरों से बदतर बने बैठें हैं । कभी आँसू चाह कर भी नहीं निकलते थे , आज रूकाए भी नही रूकते । कभी इच्छा थी ,उसे मैने चाहत बनाई , आज सपने भी जीद बने हुए हैं । कभी लोगों से बात करके मन हल्का कर लेती थी ,आज खामोशी मे अपनी खुशी ढूंढ लेती हूँ। कभी किसी के साथ को तरसती थी , आज खूद मे सूकून पा लेती हूँ ।