ख्वाब 🫠

हजारों चेहरे रोज देखती हूँ
बस तुम्हारी एक झलक की तलाश में फिरती हूँ ,
बातें करने का शौक तो बहुत है इसलिए ,
रोज तुम्हारी एक आवाज सुनने को तरसती हूँ ,
चूप-सी हो जाती हूँ , खो-सी जाती हूँ ,
जाते हुए लाखों लम्हों में ,
तुम्हे ढूंढते हुए थक-सी जाती हूँ ,
हर सुनहरा एहसास तुम्हारे साथ बाटूँगी 
एक हसीन-सी शाम तुम्हे निहारते हूए बिताऊँगी , 
हर मुखड़े में सिर्फ तुम्हारा चेहरा देखना चाहूँगी,
तुम्हारा हाथ पकड़कर दुनिया का हर सफर करना चाहूँगी ,
कड़ी धूप में छाँव बनना चाहूँगी ,
बारिश में बूंद बनकर बरसना चाहूँगी ,
जीवन के सभी दुख-सुख में तुम्हारी सरथी बनना चाहूँगी , 
और भी बातें जो शायद किसी-से ना कह पाऊँगी,
एसे कई और ख्वाब देखें है मैने ,
कभी मिलोगे तो सुनाऊँगी।  



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