किताब
हम एक किताब की तरह हैं ,
कितनी भी पुरानी हो जाए
उसके अल्फाज हीं बदलेंगे ,
कभी याद आए तो पन्ने पलटकर देख लेना ,
हम आज जैसे हैं ,
कल भी वैसे ही मिलेंगे ।
हाँ , हम खुली किताब ही हैं ,
लेकिन पढ़ने में वक्त तो लगेगा ना,
चाहो तो जो मन चाहे लिख सकते हो,
लेकिन सही वाक्य लिखने में वक्त तो लगेगा ना,
नई दोस्ती है ,
जानने-पहचाने में वक्त तो लगेगा ना ,
रास्तो पर साथ चलना चाहते हो ,
मंजिल ढूंढने में वक्त तो लगेगा ना ,
बातें-मुलाकातें होंगी ,
तुम्हे अपना बनाने में वक्त तो लगेगा ना ,
धूप की तरह बहुत लोग हैं,
छाँव बनने में वक्त तो लगेगा ना ,
बादल काफी गरज रहे हैं,
बूंदों को धरती पर गिरने में वक्त तो लगेगा ना ,
शाम हो चुकी है ,
लेकिन घर का चिराग जलाने में वक्त तो लगेगा ना ,
पौधा लगा दिया मैने,
पेड़ बनकर फल आने में वक्त तो लगेगा ना ,
यह किताब बहुत खास है ,
अब हर किसी को पढ़ने तो दे सकते नहीं ना ।
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