खुशी मिल गई
तुम मिल गए , मानो दुनिया मिल गई,
भटके मुसाफिर को , मानो मंजिल मिल गई,
अंधेरे को रोशनी की किरण मिल गई ,
चाँद को सितारों की बारात मिल गई,
गैरो को अपना बनाकर पाने की कोशिश मे युही तुमसे मुलाकात हो गई,
धीरे-धीरे मुझे मेरी जिंदगी मिल गई,
अब तुम्हारी तस्वीर मेरे दिल पर छप गई,
प्यार भरे सपनो को पाने की ख्वाहिश पुरी हो गई,
सपनों से मिलकर आज ऐसा लगा मुझे मेरी खुशियों की चाभी मिल गई ,
मेरी चाहत आज पूरी हो गई,
मानो हर दुआ मंजिल पाकर कुबूल हो गई।
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