मंजिल
हर दिन नई आस से जिंदगी चलती ,
अकेलेपन की तन्हाई मे पलती ,
कुछ अधुरी ख्वाहिशो का सहारा है ,
वरना जिंदगी तो मेरा कब का साथ छोड देती,
यह उम्मीदों की लहरें भी कमाल की हैं,
कभी थमने का नाम ही नही लेती ,
कभी नए विश्वास के साथ बहती,
कभी नई प्रेरणा बन जाती,
हर दिन नया हौसला जगाती ,
काफी रास्ते रोज दिखाती,
लेकिन मेरी मंजिलें तो देखो अब भी नजर नहीं आती ।
कहीं तो मुलाकात फिर से होगी
किसी मोड़ पर बातें फिर से होगी
लेकिन रास्तों का सफर तब-तक खतम नहीं होगा ,
जब तक मंजिल की तलाश पूरी नही होगी ।
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