तो चलो 👣
चल सको तो चलो
सफर में धूप तो होगी
तुम छाँव बनकर चल सको तो चलो ,
कई लोग मिलेगे भीड़ में,
उस भीड़ में मुझे पहचान सको तो चलो,
अंधेरों से निकलना आसान नहीं है
तुम रोशनी की किरण ला सको तो चलो,
खुशियों की बारिश में भीगने का मन कर रहा है
तुम साथ भीग सको तो चलो ,
किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
तुम अपनी राह खुद ढूंढ सको तो चलो ,
वादें आज यहाँ हर कोई करता है
तुम में उन्हें निभाने की काबिलियत हो तो चलो ,
कई रास्ते प्रतिदिन मिलेगे
एक सही रास्ते पर साथ चल सको तो चलो,
चलते हुए थक जाऊँ तो खुदमें
आराम करने की जगह दे सको तो चलो ,
चलते हुए कहीं भटक जाँऊ
तो सही राह दिखा सको तो चलो,
मैं कहीं लडखडाकर गिर जाऊँ तो
तुम संभाल सको तो चलो,
रास्ते में कई कंकड़ भी होगें
उनसे मेरी सुरक्षा कर सको तो चलो,
चलते-चलते कहीं रूकना तो पड़ेगा
यदि तुम तुम्ही पर रूकने की इजाज़त दो तो चलो,
चलते हुए तुम रास्ते बदलोगे नहीं
यह वादा भी कर सको तो चलो,
आते-जाते मुसाफिरों से दोस्ती नहीं करोगे
यह भरोसा दिला सको तो चलो ,
कहीं मुझे बीच रास्ते छोड़ोगे तो नहीं ?
यह विश्वास दिला सको तो चलो ,
यदि यह सारी चीजें तुम ना कर सको तो ,
रास्ते अकेले ही चलना अच्छा है ।
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